वृक्षासन | vrikshasana | vrikshasana benefits in hindi

Vrikshasana वृक्षासन करते समय व्यक्ति का शरीर वृक्ष की आकृति में होता है। वृक्षासन यानि वृक्ष के आकार में किया जाने वाला योगासन | वृशासन करते समय जांघ कंदा आदि में खिचाव उत्पन्न होता है जिससे उनकी मालिस होती है जिसे व मजबूत बनते है। वृक्षासन से शरीर के कर्ड बिमारियों से छुटकारा मिलता है।

वृक्षसन क्या है – Vrikshasana in hindi

जिस आसन को करते समय व्यक्ति का शरीर एक वृक्ष की स्थिती में आ जाए उसे वृक्षासन कहते है| वृक्षासन करने से व्यक्ति में वृक्ष यानि पेड़ के सामान ही संतुलित और शहनशील आती है |

वृक्षासन का इतिहास बहुत पुराना है। रामायण काल में रावण ने भगवन शिव को खुश करने के लिए वृक्षासन में ही तपस्या की थी। प्राचीन समय से ही वृक्षासन एक महत्वपूर्ण योगासन माना जाता है।

वृक्षासन से हमारा शरीर संतुलित होता है जो जीवन में बहुत जरूरी है| जीवन में शरीर का संतुलन हो या मन का दोनो सुखी जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है |

vrikshasana
© IG @yoga_alive_forever__

वैज्ञानिकों के शोध से इस बात का पता लग गया है कि बिमारियों से लड़ने में केवल देवाईगाँ ही नहीं की बल्कि योगासन भी कारगर है| भारत जिसने विश्व को योग दिया आज पूरी दुनिया भारत को विश्व गुरु मान चूका है |

भारत क विश्व योग गुरू मान चुका है। भारत में प्राचीन काल से ही बीमारियों से लड़ने की बात हो या अपनी इच्छाओं पर विजय पाने हो हमारे ऋषी मुन्नियो ने योग का ही रास्ता अपनाए |

योगासन करके ही हमारे ऋषियों ने हिमालय की बर्फ से लेकर मरुस्थल की गर्मी को सहन की क्षमता पाई थी। वृक्षासन में हम अपने शरीर में संतुलन और व्यवहार में संयम लाते हैं।

पंतजलि संस्थान के प्रयासों के कारण आज पूरा विश्व भारत की योग गुरु मनाने लगा। योग, ध्यान से शरीर की बीमारियों और मन के विचार शुद्ध होते है |

दो शब्दों के मेल से बना है | वृक्ष का अर्थ पेड़ और आसन का मुद्दा होता है। | वृक्ष जो खुद स्थिर होकर जीव के त्यांसों की गति प्रदान करता है |

वृक्षासन का अर्थ – Vrikshasana meaning in hindi

वृक्षासन में हम वृक्ष की तरह ही संतुलित और सहनशील जीवन जीने की कला सिखते है |

प्रत्येक व्यक्ति के लिए लाभकारी है उम्र चाहे जो हो |

Vrikshasana
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वृक्षासन कैसे किया जाता है – Vrikshasana steps

वृक्षासन को खडे होकर करते हैं। योगासन मुख्यता बैठकर खड़े होकर या लैटकर करते है। वृक्षासन हठ योग का आरंभिंग और आधुनिक योगासन है।

वृक्षासन कोई ज्यादा मुश्किल योगासन नहीं है। कुछ समय के अभ्यास से आप सिख सकते है | वृक्षासन में अपने पुरे शरीर का भार केवल एक ही पैर पर हाथी को ऊपर जोड़कर प्राथना की अवस्था में आना होता है।

शरीर को सीधा रखना होता है संतुलित करके वृक्षासन करना ज्यादा कठिन नहीं है बस आपको अपने शरीर को संतुलित रखना पड़ता है। वृक्षासन प्रभावित होने वाले अंग है जैसे जांघ मेरुदण्ड , टकना आदि। खिचाव भी सबसे ज्यादा इन्ही अंग पर पड़ता है।

इस आसन को करने में पूरे शरीर में खिचाव उत्पन होता है जो हाइट बढ़ाने के लिए भी लाभकारी है। वृक्षासन कौ एक दिन कम से कम ३ से ५ बार बार करना चाहिए | कोई भी योगासन स्वच्छ और शांत वातावरण में करना चाहिए

वृक्षासन करने की विधि :- vrikshasana karne ka tarika

  • योगा मेट पर ताडासन अवस्था में खड़े हो जाए |
  • शरीर को सीधा करें |
  • अब अपने दाए पैर की मोड़कर बाएँ पैर के जांघो पैर रखे
  • दाए पैर का पूरा तलवा आपके बाए पैर से सटा हो |
  • हाथी को ऊपर हवा में करके दोनों हाथों को जोडे ।
  • सांस की सामान्य रखें ।
  • शरीर को ऊपर की तरफ खींचे |
  • आँखों को खुला रखे |
  • किसी एक जगह ध्यान लगाए।
  • शरीर को संतुलित रखे |
  • चेहरे पर मुस्कुराहट रखें ।
  • इस प्रक्रिया को फिर बाएं पैर से दोहराए |

वृक्षासन का आसान रूपांतर :-

वृक्षासन करते समय यदि बिगिनर है तो संतुलन के लिए किसी दिवार का सहारा ले सकते हैं। इससे आपको गिरने का डर नही रहेगा फिर धीरे-धीरे सहारा लेने बंद कर दे।


अगर आपको हाई B.P. की समस्या रहती है तो वृक्षासन करते समय अपने हाथो को ऊपर ना करें नमस्कार की मुद्रा में हाथों को छाती से लगाकर जोड़कर कर सकते है | इससे आपकी B.P भी समान्यां रहेगा और वृक्षासन के लाभ भी प्राप्त कर सकती है।

वृक्षासन करने का समय :-vrikshasana karne ka samay

वृक्षासन करने का सही समय सुबह का ही माना जाता है। सुबह कोई भी योगासन करने से ज्यादा फायदेमंद रहता है। वैसे आप चाहे तो दिन में भी कर सकते है बस इस बात का ख्याल रखे की वृक्षासन करते समय आपका पेट खाली हो । खाना खाने के 3-4 घण्टे बाद ही करें |

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वृक्षासन कितने पैरों पर खड़े होकर किया जाता है |

वृक्षासन एक पैर पर खड़े होकर किया जाता है। वृक्षासन में एक ही और पैर भूमि पर होता है इसलिए इसमें संतुलन बनाने की बहुत जरूरी होती है।इसलिए इस आरंभीक हठ योग की श्रेणी में रखा जाता है।

वृक्षासन करने से पहले ये आसान करे :-

वृक्षासन करते समय कुछ बातें ध्यान रखने योग्य

  • वृक्षासन स्वच्छ वातावरण में करें ।
  • वृक्षासन किसी शांत जगह पर ही करें क्योंकि इस आसन में ध्यान भी लगाना पड़ता है।
  • 30- ४० सेकेंड तक इस आसान का समय रखे। अगर आपका संतुलन ठीक है तो धीरे-धीरे समय को बढ़ा सकते है
  • ध्यान रहे एक पैर ३० -60 सैकेड के बीच ही करे, समय बढ़ाना है तो फिर दूसरे पैरे का उपयोग करे |

वृक्षासन करते समय बरती जाने वाली सावधानिया :-

  • अगर आपको माइग्रेन की समस्या है तो वृक्षासन का अभ्यास ना करे ।
  • अनिंदा के समय भी वृक्षासन ना करे |
  • सबसे ज्यादा ध्यान B.P वाले मरिजो को देना पड़ता है। ब्लड प्रेशर अगर हाई हो या low दोनों में ही वृक्षासन सावधानी पूवर्क करें। किसी योग प्रशिक्षक की उपस्थिती में ही करें। हाथों को ऊपर करने से B.P बढ़ता है।
  • घुटनों में दर्द रहता है तब भी वृक्षासन न करे | करना भी चाहते है तो पहले डॉक्टर की सलाह ले कर ही करें।
  • एडियों में दर्द रहता है तो वृक्षासन का अभ्यास ना करें | वृक्षासन में एक पैर पर करना होता है जिससे एक पैर पर ज्यादा दबाव बनाता है।
  • वृक्षासन करते समय ध्यान रहे की आप किसी चिंता या तनाव में ना हो इसमें ध्यान लगाने में समस्या होगी।

योगासन शरीर के लिए फायदेमंद होता अगर उसे सही विधि से सही समय पर किया जाए | योगासन करते समय उस योगासन से जुड़ी सावधानियों को अवश्य ध्यान में रखें। इससे आपके शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा वृक्षासन करते समय कुछ बातो को ध्यान में रख जाए तो उसका ज्यादा फायदा होगा |


वृक्षासन के फायदे – vrikshasana benefits

वृक्षासन के विधि सावधानियाँ जानने के बाद अब इसके फायदों के बारे में जानते है ताकि आप वृक्षासन करने के लिए प्रेरित हो सके । वृक्षासन के बहुत सारे लाभ है जिनका प्रयोग करके हम अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं। तो चलिए जानते है वृक्षासन के लाभ

शरीर के संतुलन :-संतुलन बहुत जरूरी है शरीर को हो या जीवन का | वृक्षासन करने से हमारे शरीर में संतुलन बढ़ाता है। व्यक्ति अपने शरीर को संतुलित करना सिखता है।

२ कद बढ़ाने में लाभकारी :- वृद्धासन के नियमित अभ्यास से कद भी बढ़ाता है। बच्चों के लिए वृक्षासन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। जिन बच्चों की हाइट कम है उनको वृक्षासन अवस्य करना चाहिए। वृक्षासन हाइट बढ़ाने में मददगार होती है।

३ सायटिक में लाभकारी :-वृक्षासन करने से सायटिक की समस्या में द राहत मिलती है।


वजन कम करता :- वृक्षासन करने से वजन सामान्य रहता है। मोटे शरीर वाले व्यक्तियों के लिए ज्यादा लाभकारी होता है इस आसन से वजन कम होता है।

पैरों की मजबूती :-वृक्षासन करते समय सबसे ज्यादा तनाव पैरों पर ही पड़ता है इससे पैरों की मसाज हो जाती है। वृक्षासन करने से पैरो की मजबूतीबढ़ाती है।

6 घुटने के दर्द में :- वृक्षासन के नियमित अभ्यास से घुटनों का दर्द कम किया जा सकता है |

7 गठिया में लाशकारी :-गठिया वाले रोगियों के लिए वृक्षासन बहुत फायदेमंद होता है। वृक्षासन के नियमित अभ्यास से गठिया के दर्द से राहत मिलता है।

८ तनाव को कम करता :-तनाव को कम करने का एक मात्र तरिका है योगासन | वृक्षासन हो या कोई और योगासन सब तनाव को खत्म करने में सहायक होती है |

९ नसो के दर्द से छुटकारा :- वृक्षासन करने से नसों के दर्द से छुटकारा मिलता है।

१० एकाग्रता बढ़ती है :- वृक्षासन को करने से एकाग्रता बढ़ती है। जब हम वृक्षासन करते है तो शरीर को संतुलित करते हैं। संयम के साथ ध्यान लगता है । संयम संतुलन को जोड़ता है वृक्षासन ।

११ छाती की चौड़ाई बढ़ाने में मदद करता :-वृक्षासन के नियमित अभ्यास से छाती की चौदाई बढ़ाने में मदद करती है। शरीर का आकार ठीक करने में सहायक होती हैं।

१२ पैरो के मसल्स को टोन करता है लिगामेट टेडोस को मजबूत करता है।
१३ रीड की हड्डी मजबूत होती है।

वृक्षासन करने के फायदे बहुत है। आप इस दैनिक जीवन में शामिल करके
शरीर को स्वस्थ बना सकते है।


वृक्षासन के नुकसान

किसी भी आसान का शरीर को कोई नुशासन तो नहीं होता लेकिन हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग होती है। विमारी भी अलग-अलग होती है इसलिए कुछ बीमारियों में भोगासन नहीं करना चाहिए। वृक्षासन के भी कुछ नुकसान है।

. कोई गंभीर रोग है तो इस आसन को ना करें क्योंकि हो सकता है कि आपके शरीर पर इसका विपरित प्रभाव पड़ता है |

. हाई ब्लड प्रेशर वालों के लिए वृक्षासन नुकसानदायक हो सकता है हाथ ऊपर करने से ब्लड प्रेसर बढती है जो high blod presar वालो के लिए खतरा माना जाता है

. पैर में कहीं चोट या सर्जरी हुई है तभी वृक्षासन नुकासनदायक हो सकता क्योकि वृक्षासन में शरीर का संतुलन सबसे ज्यादा जरूरी होता है।

वृक्षासन के बाद किया जाने वाला आसन :-

वृक्षासन के बाद कोई भी खड़े होकर किया जाने वाला आसन करना चाहिए।

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