uttanpadasana in hindi | uttanpadasana ke fayde | उत्तानपादासन

 उत्तानपादासन -uttanpadasana in hindi

उत्तानपादासन  तीन संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है  | जिसमें उत्तान का अर्थ ऊपर उठा हुआ तथा खिचा हुआ, पाद का अर्थ पाँव और आसन का अर्थ मुद्रा होता है।

तीनों को मिलाकर देख तो पाँव  को ऊपर उठाने वाला मुद्रा हैं उत्तानपादआसन को करने से शरीर के कई सारी समस्याओ से निजाद मिलता है| 

शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। आज के समय खानपान में इतना बदलाव हो गया  है लोगों में मोटापा डायबिटिज, गैस, अपच, कब्ज जैसी समस्या आम हो गई है।

uttanpadasana in hindi
uttanpadasana in hindi

तनाव पूर्ण जीवन से सब आगे निकलना चाहते है | इससे उनके शरीर पर क्या असर पड़ रहा है ध्यान नहीं देते। आज कल सब को  स्वस्थ शरीर की लालसा रहती है लेकिन
लोग अपने दिनचर्या में कोई परिवर्तन नहीं करना चाहते / अगर आप अपने सुबह कुछ समय योगासन को दे  तो इससे आपका शरीर और मन दोनो स्वस्थ  रहगा | आपके  काम करने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी ।

उत्तानपादासन क्या है ? उतानपादासन जिसमें आपका शरीर का नीचला हिस्सा यानि कमर के नीचे का हिस्सा पैर तक ऊपर उठा हुआ हो | इस आसन को करते समय आपके पैर की मासपेशियों और कमर के पास ज्यादा खिचाव महसुस होगा |

पेट से जड़ी समस्याओं के लिए सबसे अच्छा योगासन माना जाता है। उत्तानपादासन करने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती । एक दिन के अभ्यास से आप इसमें निपूर्ण हो सकते हैं। Daily  Yoga life में  उत्तानपादासन शामिल कर सकते है | 


उत्तानपादासन कैसे करें ?

उत्तानपादासन  को करना सरल है। पीठ के बल लेट कर अपने कमर के निचले हिस्से का ५० कोण तक उठाना है, सर जमीन से लगा  हो ।  दोनों हाथ भी जमीन पर रखें| 

उत्तानपादासन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखे :- 

साफ स्वस्थ वातावरण में करें। इस आसन को करते समय हमेशा ढील और सुविधाजनक कपडे ही पहने| 

समझ-सीमा अपनी क्षमता अनुसार रखे 30 या 60 सेकण्ड तक |

खाना खान के  तुरंत बाद इसे आसन को न करें |

 योगासन करने का सबसे उत्तम समय आपके पास सुबह का होता है। लेकिन समय ना होने पर दिन में भी कर सकते हैं|

ध्यान रहे खाली पेट इस आसन को करना है |

किसी भी आसन को करते समय जल्दबाजी न करे|


उत्तानपादासन की विधि – uttanpadasana ki vidhi

उत्तानपादासन करने का सबसे सरल जिसे आप सिख भी जल्दी सकते हैं और इसका फायदा भी ले सके।

योगामेट या चटाई बिछ कर पीठ के बल लेट जाए।

दोनों हाथों को सीधा करके अपने पस हिप के पास रखें।

पैरो को भी सीधा रखें। धीरे-धीरे उनको उठाने की कोशिश करें।

सिर को जमीन से लगा रहने दे |

पैर को 30-40 के मध्य मे । पैर को एक दम सीधा रख इसमें थोड़ी बहुत परेशानी हो सकती है।

कमर के ऊपर का हिस्सा ज़मीन पर रहेगा और इसके नीचे का हिस्सा यानि पैर वाला हिस्सा ऊपर हवा म में रहेगा ।

अगर आप को योगासन करने में किसी प्रकार की समस्या आ रही तो किसी योगा प्रशिक्षक की सलाह और सहायत ले सकते है |

uttanpadasana in hindi | uttanpadasana ke fayde | उत्तानपादासन


uttanpadasana ke fayde in hindi – Benefits of uttanpadasana in hindi

उत्तानपादासन के लाभ बहुत सारे है जो आपको शरीर को स्वस्थ , सुन्दर बनाने में सहायक है |

१. चर्बी कम होती है : आज के समय में हर व्यक्ति फिट दिखना चाहता है। जो व्यक्ति अपने पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करके स्लिम बॉडी पाना चाहते है उनके लिए उत्तानपादासन बहुत लाभकारी है।

2. घबराहट कम करता है : इस आसन के नियमित अभ्यास से घबराहट की समस्या को खत्म किया जा सकता | जिन व्यक्ति को जल्दी किसी बात पर घबराहट हो जाती है| उनको उत्तानपादासन जरूर करना चाहिए।

३. पाचन क्रिया ठीक : इस आसन से पाचन क्रिया भी ठीक प्रकार से कार्य करती है |

नाभि संतुलन : उत्तानपादासन नाभि संतुलन में बहुत लाभकारी होता है ।
पैर के लिए : इस आसन का सबसे ज्यादा लाभ पैर और पेट को मिलता है। इस

आसन के अभ्यास से पैर के कई प्रकार के रोगों से छूटकारा मिलता है। पैर का फुलना, सुनापन , सनसनाहट आदि से हमेशा के लिए निजाद मिल सकता है|

पेट के लिए: उत्तानपादासन करने से पेट से जुड़ी समस्या जैसे गैस, कब्ज अपच आदि से छुटकार मिलता है, पाचन प्रणाली की कार्य क्षमता बढ़ती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए लाभकारी : उत्तानपादासन और तितली आसन दोनो प्रेग्नेट महिलाओं के लिए बहुत अच्छा आसन माना जाता है। इन आसनो को करने से प्रसव के समय कम समस्या होती है तथा दर्द भी कम होता है।

ऊर्जा बढ़ाने के लिए : इस आसन से शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार होता

है। शरीर में ताजगी बनी रहती है।

पेट दर्द में लाभकारी – जिन व्यक्तियों की पेट दर्द की समस्या रहती है उन व्यक्तियो के लिए भी ये आसन काफी फायदेमंद है|

घुटने के लिए : उत्तानपादासन करने से घुटने का दर्द कम होता है, घुटने मजबूत भी होते है इस आसन को करने से

कमर मजबूत करता : उत्तानपादासन के नियमित अभ्यास से कमर दर्द कमर अकड़ से छूटकारा मिलता है |

उत्तानपादासन करने से पेट छाती का थुथलापन, पेडू का भद्दापन खत्म होता है |

हर्निय वाले रोगियों के लिए भी उत्तानपादासन बहुत लाभकारी है।

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त्तानपादासन किसे नहीं करना चाहिए ?

उत्तानपादासन वैसे तो सभी व्यक्तियों के लिए के लाभकारी है फिर भी कुछ बिमारियों में इसका नुकसान भी हो सकता है किन रोगियों या उत्तानपादासन किन व्यक्तियो को नहीं करना चाहिए इसके बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है।
किसी गंभीर रोग से ग्रसित व्यक्मियों को उत्तानपादासन नहीं करना चाहिए।
किसी भी प्रकार की सर्जरी होने के बाद डॉक्टर की सलाह के बाद ही ये आसन करें
गर्भवती महिलाएं इस आसन को सकती है लेकिन डॉक्टर से सलाह बाद ही आसन का अभ्यास करें
दमा अस्यमा, BP वाले और हर्निया वाले रोगियों को डॉक्टर के सलाह के बाद तथा प्रशिक्षक के उपस्थिती में ही करे|

उत्तानपादासन और नौकासन में अंतर ?

कई लोग उत्तानपादासन और नौकासन को एक ही समझते हैं। दोनों आसनो को लेकर मतभेद में रहते हैं। जबकि दोनों में बहुत अंतर है। उत्तानपादासन में केवल कमर का हिस्सा ऊपर हवा में होता है| हाथ और सिर जमीन पर ही होते है | नौकासन में कमर से ऊपर और नीचे का पूरा भाग हवा में रहता है। नौकासन में बस कमर जमीन को छूती है बाकि शरीर ऊपर रहता है। नौकासन का प्रभाव को जांघ, गर्दन पैर व् पेट पडता हैं। जबकि उत्तानपादासन में ऐसा नहीं होता है। इस आसन मे खिचाव पैर की जाध पर और कमर पास ज्यादा है। दोनों आसन के लाभ भी अलग-अलग है। किसी भी आसन को अगर आप सही विधि के साथ करते है तो इसका लाभ शरीर को अवस्य मिलता है।

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