siddhasana in hindi | सिद्धासन फायदे और सावधानियां |

सिध्दासन – Siddhasan in hindi

सिद्धासन सभी आसन में सबसे अच्छा माने जाने वाला योग है। कहते है योगासन में सबसे सर्वश्रेष्ट आसन
है। सिद्धासन जैसा की नाम से प्रतित हो रहा है कि सिद्धि को पाने वाला आसन है।

सिद्धासन के नियमित अभ्यास से व्यक्ति को अनेक सिद्धियो की प्राप्ती होती है। सिद्धासन उनके लिए ज्यादा फायदेमंद है जो ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहते है| 

siddhasana in hindi
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सिद्धासन  क्या है ? what is siddhasana in hindi ?

सिद्धासन दो शब्दों के मेल से बना है जिसमे सिद्ध का अर्थ होता है सिद्ध हो जाना या सिद्धियाँ प्राप्त करने वाला  आसन |आज के समय में इसका महत्व और बढ़ गया है |

इस समय जब व्यक्ति मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की समस्याओं से परेशान है। ऐसे में योगासन शरीर में रोगो को ठीक करना और नए रोगो से आपको बचाना दोनो काम करता है |

सिद्ध मतलब पुर्ण यानि कि (Accomplished) हो जाना। अग्रेजी में सिद्धासन को (auspiciouse pose) या (Accomplished Pose ) भी कहा जाता है।

सिद्धासन एक प्रकार का हठ योग है हठ योग में मध्यम कठिनाई वाला योगासन
या इंटरमीडिएट प्रकार का योगासन माना जाता है।

सिद्धासन का वर्णन हठ योग के ग्रंथ धेरङ संहिता में 32 आसनों ‘मैं सबसे पहला योगासन माना गया है| कहते है सिद्धासन जैसा कोई योगासन नहीं | प्राचीन समय से हमारे ऋषि मुनियों ने अपने जीवन में सिद्धी पाने के लिए सिद्धासन किए ।

अपने बहाचर्य को पालन करने के लिए ,मन के विचारों को नियंत्रित करने के लिए
जीवन को संतुलित करने के लिए सिद्धासन सबसे उत्तम आसन है |

सिद्धासन के नियमित अभ्यास से आपके घुटने की मांसपेशियों, श्रेणी , नितंब रीढ़ की हड्‌डीया मजबूत होती है। इन मासपेशियों की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है|

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अब विज्ञान ने भी माना लिया है कि योगासन काफी रोगों, बीमारियो में लाभदायक है|
दीर्घकालिन रोगों में दवाई से अच्छा प्रभाव योगासन का पड़ता है ।

योगासन करने से एक साथ शरीर के कई बिमारियों से छुटकारा मिलता है।
योगासन को कोई साइट इफ़ेक्ट भी नहीं होता । आज के तनाव पूर्ण जीवन में शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्य
के लिए योगा बहुत जरूरी है।

सुबह के कुछ समय के लिए किया गया योगासन का फायदा आपको पूरा
दिन मिलता है। सिद्धासन करने के अभ्यास से आप अपने कार्य को ज्यादा निपूर्णता से करते है |

सिद्धासन करने से कई प्रकार के रोगों से निजात मिलता है। जैसे श्रास रोग, मदाग्नि, अजीर्ण
‘मरोड़ा, स्वपनदोष जैसे  रोगों में बहुत लाभकारी है।

सिद्धासन करने से केवल शरीर ही नहींआपका मन भी स्वस्थ रहता है | सिद्धासन के आध्यात्मिक लाभ भी है।
कई ऋषि  मानते है कि सिद्धासन अगर सच्चे साफ मन से तथा सही तरीके से किया जाए तो यह अलौकिक शक्ति का प्रवेश द्वार है ।
सिद्धासन के नियमित अभ्यास से निष्पति अवस्था समाधि की अवस्था पा लेता है सिद्धासन करने से मनुष्य स्वतः ही तीनो (जालंधर, मूलब्ध, उड्डीयन ) 1 बंध जाते है |

इस आसन को करने से समस्यत नाडियों का शुद्धीकरण हो जाता है। मन के सारे विकार नष्ट हो जाते है |

योग भारत की देन है जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है। योग किसी भी जाति धर्म
देश से परे है। सिद्धासन करने से मनुष्य में अपने अन्दर छुपे  ऊर्जा को पहचानता है। ज्ञानचक्र को
जागृत करता है। सिद्धासन से स्मरण  शक्ति भी काफी प्रभावित होती है। स्मरण शक्ति सामान्य लोगों से बेहतर रहता है।
किसी भी समस्या को आसानी से हल करने का गुण उत्पन्न होता है

पद्मासन के बाद योगासन में दूसरे स्थान पर सिद्धासन का हीं स्थान है। लेकिन पद्मासन से अच्छा माना जाता है|  प्राचीन समय में हमारे ऋषि सिद्धासन में ही बैठ कर जप तप किया करते थे।

जिससे उनको कई
प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती थी। सिद्धासन का महत्व आज भी उतना ही है
जितना प्राचीन समय में | सिद्धासन सर्वश्रेष्ठ आसन है|

siddhasana in hindi
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सिद्धासन की विधि – Steps of Siddhasana in hindi

सिद्धासन जैस की पहले बताया गया है यह एक मध्यम कठिनाई वाला योगासन है शुरुआती समय में थोड़ी समस्या हो सकती है  लेकिन कुछ समय के अभ्यास के बाद आप सिद्धासन करने में निपूर्ण हो सकते है |

सिद्धासन को करने का सबसे सरल तरिका आपको बताते है।

१ सबसे पहले योगा मेट विछाकर बैठ जाए पैर खुले अर्थात् | सीधा सामने की
तरफ रखें ।

२ इसके बाद अपने बाएँ पैर की एड़ी को गुदा और जननेन्दियों में बीच में रखे |
३ दाहिन पैर की एडी को भी जननेन्द्रियों के बीच में रखे |

४ ध्यान रहे जननेद्रियों पर कोई ज्यादा दबात ना पड़े।

५ अब अपने दोनों पैरो के पंजों को पिडलियों को ऊपर रखे |

६ घुटने जमीन पर तथा दोनों पैर के तलवे जधाओं की बीच में होना चाहिए |

७ दोनों हाथों को घुटने के ऊपर ज्ञान मुद्रा ध्यान मुद्रा में रखें।

८ रीढ़  की हड्‌डी को सीधा रखे ।
९ स्वास को सामान्यतय धीरे-धीरे छोड़े और धीरे-धीरे ही अन्दर ले ।श्वासन क्रिया में जल्दबाजी ना करें ।

१० अपनी नाक के सबसे अगले भाग पर ध्यान केंद्रित करे |

११ मन  चिंता मुक्त होना चाहिए।
१२  चेहरे पर मुस्कुरहवा रखे।

कब  करना चाहिए सिद्धासन :- सिद्धासन का सबसे अच्छा समय सुबह का होता है  अगर आप सुबह शौच आदि से  निवृत होकर सिद्धासन करते है तो इस आसन का ज्यादा लाभ मिलगा ।

कोई भी योगासन  या ध्यान
सुबह का समय उत्तम है क्योंकि सुबह का वातावरण और मन दोनो शांत रहता है |
प्रतिदिन 45 मिनट  आपका पूरा दिन काम करने की क्षमता देता है |

कैसे करे सिद्धासन :-सुबह के समय खाली पेट सिद्धासन करना सबसे ज्यादा लाभकारी माना गया है |
सिद्धासन में आपको पैर मोडने वाले विधि पर ध्यान देना चाहिए।

अगर पहले से आपके पैर में कोई समस्या
या  रोग से ग्रस्त  है। तो सिद्धासन का अभ्यास ना करें। सिद्धासन मे जल्दबाजी ना करें। संयम के साथ करे |
देखने में सिद्धासन आसान लगता है लेकिन करने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है।

इससे परेशान ना हो
अगर आपके अन्दर सिखने की चाह है तो आप जल्द ही सिद्धासन सिख सकते है बस जरूरत है नियमित
और सही अभ्यास की।

 कब  ना करें  :- सिद्धासन वैसे तो आप चाहे तो सुबह या समय का अभाव हो तो दिन में भी
सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखे की खाना खाने के तुरंत बाद सिद्धासन
का अभ्यास नहीं करना है,अगर आप दिन में अभ्यास कर रहे हैं तो खाना खाने के 3-4 घंटे बाद ही करे | 

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सिद्धासन के लिए जरूर बाते 

१ सिद्धासन हो या अन्य और कोई भी योगासन करते समय इस बात का पूरा ख्याल रखें कि आपने कपड़े कैसे पहने हैं। योगासन करते समय हमेशा ढीले कपडे पहने जिसमें आप Comfortable हो |
महिलाए इस बात का भी ध्यान रखे की योगासन करते समय ज्यादा आभूषण ना पहने । अगर आभूषण पहने भी हो तो वह भी हल्के हो | इससे ध्यान लगाने में आसानी होती है |

२ सिद्धासन करने से पहले एक साफ सुधरी जगह का इंतजाम कर ले जहां पर आप बैठ कर अभ्यास करगे वातावरण साफ और शांत  रहेगा तो योग लाभकारी होगा |

३ योग शरीर से रोगों को दूर करता है और मन से नकारात्मक विचारो को दूर करता है। सिद्धासन को करते समय खुद को खुश रखने की कोशिश कीजिए | चेहरे पर मुस्कुराहट रखें
ताकि आपका ध्यान केंद्रित करते समय नकारात्मक विचार मन में ना आए|

४ सांस को सामान्य रखे । ना ज्यादा तेज और ना ही ज्यादा धीरे । आप चाहे तो श्वास पर भी ध्यान लगा सकते है।
अगर नहीं तो आप आपनी नाक सबसे अगली भाग पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

ध्यान लगाते समय अपने  मन की विचारो पर नियंत्रण रखे।

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समय सीमा क्या है सिद्धासन का ? 

1 सिद्धासन की समय सीमा आप अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ा सकते है। शुरुआत में सिद्धासन
करने में कठिनाई हो रही हो तो एक मिनट का ही समय सीमा रखे ,बाद में धीरे-धीरे इसमें बढ़ोतरी करे । सिद्धासन में निपुण होने बाद इसे आप 10 या 1५  मिनट तक कर सकते हैं।

सिद्धासन में दोहराव नहीं होता यानि की आप इसे एक समय में एक बार ही करे
बाकि बचे समय में कोई और योगासन कर सकते हैं |

सिद्धासन करने से पहले आप कुछ और योगासन का अभ्यास करे | ध्यान रहे वॉमआप
के बाद ही सिद्धासन का अभ्यास करे । सिद्धासन से पहले आप चाहे तो पदासन कर सकते है |  शरीर के लिए उत्तम भी है और सरल भी |

सिद्धासन का अभ्यास करते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ 

१  जिन व्यक्तियों के घुटने , टकने, रीढ़  में किसी भी प्रकार का चौट या दर्द हो तो सिद्धासन से बचना चाहिए ।
२  गंभीर रोग से ग्रस्त  रोगियों को भी सिद्धासन नहीं करना चाहिए |
३ महिलाएं मासिक धर्म के दौरान इस आसन का अभ्यास ना करे|

४  हर्निया, बवासीर वाले रोगियों को सावधानीपूर्वक सिद्धासन करना चाहिए |

५  किसी प्रकार का कोई Operation  या सर्जरी हुई है। तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले सकते है |

६ अगर आप से नहीं हो पा रहा है तो आप किसी योगाटीचर की मदद भी ले सकते है |

७  सिद्धासन का अभ्यास नियमित रूप से करें।

सिद्धासन के लाभ – Benefits of Siddhasana in hindi 

१  सिद्वासन के आप के शरीर के लिएबहुत लाभदायक है। सिद्धासन आपके शरीर को स्वस्थ और मन को शांत
रखता है। अगर आप अपने दैनिक योगा जीवन में इससे आपनाते है तो आपको बहुत सारे फयदे मिल सकते
है और आप अपने जीवन की नई दिशा दे सकते हैं|

शारीरिक लाभ :-

१ पाचन क्रिया में सुधार :- सिद्धासन करने से पाचन क्रिया मे सुधार होता है पाचन क्रिया ठीक प्रकार से कार्य नहीं करती तो आप को सिद्धासन करना चाहिए , इससे पाचन क्रिया ठीक रहती है।

खाया हुआ अच्छे से पचता है । जिससे कब्ज गैस जैसी सामान्य समस्या उत्पन्न नहीं होती। और आप अपने जीवन में खुश रहते हैं ।

डायबिटीज में लाभकारी : डायबिटीज वाले रोगियो के लिए भी सिद्धासन काफी लाभदायक है। सिद्धासन के अभ्यास से डायविटिज से कन्ट्रोल रहता है।

स्वास सम्बंधित रोग से छुटकारा :-सिद्धासन करने से श्वास सम्बन्धित रोगों से भी छुटकारा मिलता है। श्वासन प्रणाली बहेतर तरिके से काम करती है।

क्षय, दमा में लाभकारी :=> क्षय दमा जैसे गंभीर और दीर्घकालिन रोगों में भी सिद्धासन बहुत लाभकारी माना जाता है | इस आसन के नियमित अभ्यास से आप क्षय , दमा जैसे रोगो से राहत पा सकते है ।

भूख ना लगने जैसी समस्या खत्म :- सिद्धासन करने से भूख ना लगने जैसी समस्याओं से भी राहत मिलती है जिन व्यक्तियों को भूख ना लगने की शिकायत होती है उनको सिद्धासन अवसय करना चाहिए।

नाडियों का शुद्धिकरण :- सिद्धासन करने से समस्त नाडियों का शुद्धिकरण होता है। यह योगासन शरीर के 72000. नाड़ियो को शुद्ध करता है। जिससे शरीर और मन दोनो स्वस्थ रहते हैं।

वीर्य की रक्षा :- वीर्य की रक्षा होती हैं। स्वपनदोष वाले रोगियों को सिद्धासन अवश्य करना चाहिए। योगीजन सिद्धासन के अभ्यास से वीर्य की रक्षा करके प्राणायाम के द्वारा मस्तिष्क की ओर ले जाकर जिससे वीर्य, ओज तथा मेधाशक्ति में परिणत हो कर  दिल्यता का अनुभव करता है। ।मानसिक शक्तियों का विकास होता है |

मानसिक लाभ,

कुंडलीनी जागरण :- सिद्धासन करने से कुंडलिनी जाग्रत  होती है।

अवसाद : आज के समय में अवसाद एक सामान्य रोग बन गया है। किसी भी उम्र की व्यक्ति में होना आम बात है।सिद्धासन करने से अवरसाद खत्म होता है।

अनिंद्रा :-  सिद्धासन के नियमीत अभ्यास से अनिद्रा जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। जिन व्यक्तियों
को अनिद्रा की समस्या रहती है, उनको सिद्धासन अवश्य करना चाहिए |

थकान :- सिद्धासन शारीरिक और मानासेक दोनों प्रकार की थकान को दूर करता है। इसलिए सिद्धासन समानय जीवन में महत्पूर्ण भूमिका निभाता है।

ब्रहाचार्य को प्राप्ती में सहायक है:- जो व्यक्ति अपने जिवन में ब्रहाचार्य का पालन करना चाहता है उनके लिए सिद्धासन अति महत्वपूर्ण आसनों में से एक है। सिद्धासन के करने से ब्रहाचार्य वर्त को निभाने में सहायता मिलती है।

दिमाग को तेज करता है :-  सिद्धासन करने से दिमाग तेज होता है और समरण शक्ति में वृद्धि होती है। सिद्धासन ध्यान आदि में भी बहुत लाभकारी होता है।

अध्यातमिक लाभ प्राप्त होता है :- सिद्धासन करने से शारीरिक और मानसिक लाभ के साथ-साथ अध्यातमिक लाभ भी प्राप्ती होती है, सिद्धासन को अध्यात्‌मिक  का प्रवेश द्वारा माना जाता है। सिद्धासन करने वाला व्यक्ति अपने समस्त ऊजा का उपयोग करके परम शक्ति को
महसूस करता है। सिद्धासन

) सिद्धासन मुलाधार चक्र पर दबाव डालता है जिससे
मूलबनध स्वत: लग जाता है सिद्धासन मूलाधार
क्षेत्र में रक्त आपूर्ति की कमी तथा, चको में
प्राण प्रवाह के पुलह संतुलन में सहायक है

सिद्धासन प्रजनन हामोनों के स्त्राव हो के निर्यन्त्र करता है अध्यात्मक प्रागतिक लिए आवश्यक है
 सिद्धासन  के नुकसान सिद्धासन उन व्यक्तियों के लिए हानिकारक है जिन व्याक्तयों को घुटने  में दर्द जोड़ो में  दुर्द की  शीकायत हो उन व्याक्तयों को सिद्धाराम नहीं करना चाहिए

गर्भ अवस्था के  दौरान भी ये खतरनाक  हो सकता है इसलिए महिलाएं गर्भ अवस्था के दौरान सिद्धासन न कर हरनिया वाले व्यक्तियों के लिए भी  हानिकारक है| 

ऐसे व्यक्तियो को डाक्टर कि सलाह के बाद ही सिद्धासन करना चाहिए।

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