shavasana in hindi | शवासन योग का तरीका और फायदे

शवासन – shavasana in hindi

शवासन एक योग का चरण माना जाता है। शवासन कभी भी सभी योगासन के बाद में ही किया जाता है | इससे शरीर के साथ मन थकान दूर होती हैं और एक आरामदायक आनंद की प्राप्ति होती है। इस आसन में शरीर को शिथिल करते हैं जिससे मन कि शिथिलता प्राप्त होती है। शवासन लेट कर किया जाने वाला आसन है |

shavasana in hindi
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शवासन योग का अर्थ – shavasana meaning in hindi

शवासन दो शब्दों के मेल से बना है जिसका अर्थ शव का “मृत शरीर ” तथा आसन का अर्थ “मुद्रा “शवासन मतलब शरीर की वो अवस्था जिसमें हम मृत शरीर की तरह खुद को ढीला छोड़ देते है शवासन को ध्यान की श्रेणी में रखा जाता है। इस आसन को देखने में अत्यंत सरल लगता है लेकिन इसमें शरीर के साथ मन को भी शांत करना होता है|  शासन को अंग्रेजी में Cospse Pase भी कहते हैं। शवासन साधारण कठिनाई वाला अष्टांग योग का आसन है ।

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शवासन कैसे करे – shavasana kaise kare

शवासन को लेट कर किया जाता है। इस आसन में हम अपने शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ देते हैं हाथ दौरों को फैलाकर आराम की अवस्था में लेट जाते है। इस आसन को सिखने में कोई समस्या नहीं होती है । शवासन एक सरल आसन है जो सब आसनों को करने के बाद किया जाता है इसे अंतिम योगासन भी कहते है। जो लोग शवासन करने की शुरूआत करना चाहते है उनको इस बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि शवासन बस लेटने और आँख बंद करने से ही पूर्ण नहीं होता । ध्यान के जैसे ही इसमें अपने मन की चंचलता की नियंत्रण करके अपने ध्यान को केन्द्रि करना पड़ता है। केवल शवासन न करें कोई और अन्य आसन करने के बाद ही करें | 

शवासन जितना सरल दिखता है उतना होता नहीं है। तो अगर आप बिगनर्स हैं तो इस बीत पर ध्यान अवश्य दे। क्योंकि सभी योगासन की अपनी प्रक्रिया होती है जिससे हमें पूरा करना होता है। किसी भी योगासन को अधुरा करने से हमारे शरीर को कोई लाभ नहीं मिलता है।

शवासन जिसका नाम सुन के आपको थोडा अजीब लग सकता है लेकिन हमारे योगगुरू महृषि पतंजलि और बाकि सभी योगमुरू ने किसी भी योगासन का नाम उसकी स्थिती शरीर की आकृति के आधार पर दिया है  । जिस आसन को करते समय शरीर जिस प्रकार के आकार में होता है वैसा ही उस आसन का नाम  है । शवासन में हमारा शरीर बिलकुल एक मृत के सामान पड़ा रहता है।

shavasana in hindi
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शवासन करने की विधि – shavasana karne ki vidhi

शवासन करने के लिए शरीर के किसी अंग को मोड कर कोई विशेष आकार नहीं देना होता |

  1.  सबसे पहले योगामेट या चटाई पर आराम की अवस्था में लेट जाए |
  2.  पीठ के बल लेटने है।
  3.  अपने पैरों को 15-20 inch की दूरी पर फलाएं  पैर की ऊँगली आपस में मिले ना सब अलग-अलग हो पंजे थोडी बाहर की तरफ झुक हो ।
  4.  दोनों हाथ दोनो तरफ फैला हुआ। ऊँगलिया थोड़ी ऊपर उठी हुई |
  5.  सर जमीन से लगा हो ।
  6.  आँख बंद होनी चाहिए।
  7. आपका पूरा शरीर आराम की अवस्था में हो |
  8.  शरीर की किसी भी भाग पर ज्यादा दबाव न दे।
  9.  शरीर को बिल्कल सीधा लेकिन इसका बतलब ये नहीं है कि आप शरीर को अकड़ में रखे |
  10. शरीर को ढीला रखें उसमें अगर आपके हाथ पाँच मूड जाते है तो कोई बात नहीं |
  11. अब आसन में आंख को बंद करनेके बाद अपने अन्दर आने वाले विचारों को भी रोकने का प्रयास करें।
  12.  मन को जितना हो सके शांत रखें इसलिए आप उलटी गिनती भी गिन सकते है।
  13.  आराम से धीरे-धीरे बंद आंखों के मध्य में जो रोशनी है उसे देखने की कोशिश करें।
  14.   सांस को धीरे धीरे ले और छोडे । सांस लेते समय ऊर्जा का अनुभव करे तथा सांस छोड़ते समय शितलता का 
  15.  आसन समाप्त करते समय दाहिने तरफ करवट जाए फिर थोडि देर बाद बैठकर सामान्य अवस्था में आ जाए 

शवासन करने से पहले कुछ ध्यान देने वाली बातें

१ जो आसन आप करते है उस आसन को करने के बाद ही शवासन करे |

२ आसन करने के बाद शरीर थक जाता है। शकान को कम करने के लिए ही अंतिम में शवासन करते हैं।

३ पीठ के नीचे पौरोपर दरी या चटाई हो जिसमें आप ज्यादा Comfarteble हो ताकि नीचे से फर्स चुभे ना और आप आसन आराम से कर सके।

४  कपडे हमेशा सुविधाजनक पहने ।

५ शवासन को जल्दबाजी में करने कि कोशिश ना करे अगर आपके पास इसके लिए समय नहीं है तो कोई बात नहीं है । शवासन में ध्यान लगाना होता है इसलिए आप इस आसन को जल्दबाजी या जबरदस्ती नहीं कर सकते।

शवासन की समय सीमा

कई लोगों के मन में इसकी समय सीमा को लेकर गलत धारणा विकसित हो जाती है उनको लगता है आराम लेटना ही तो है कितनी भी देर तक लेट कर आराम कर सकते है और उसे शवासन का नाम दे देता है । यह गलत है शवासन में केवल लेट कर आराम ही नहीं करना होता ध्यान भी लगाना होता है |

इसलिए शुरूआत में आप जितने समय तक अपने मन और शरीर को शांत ध्यान लगा सकते हैं तब तक ही आपको शवासन करना चाहिए|  इसलिए शुरुआत में 2-4 मिनट का समय आप ले सकते है इससे ज्यादा ना ले क्योंकि हो सकता  है कि आपको नींद आ जाए 1

नींद से सोने को शवासन नहीं करते बल्कि शरीर से सो कर मन से जागने को शवासन कहते है। धीरे-धीरे आप समय सीमा बढ़ा सकते है | अगर आप इसमें निपूर्ण हो गए है। तो 30 मिनट से ज्यादा भी समय ले सकते है | ज्यादा समय तक न करें क्युकी हो सकता है की इससे आपको नींद आ जाये | 

शवासन के लिए स्थान  शवासन कभी भी आपको शांत स्वच्छ वातावरण में करना चाहिए जहां कोर्ड शोर शराबा ना हो |  कोई परेशान ना कर सके । इसके लिए आप कोई घर का खाली कोना या छत पर कर सकते है|

शवासन से पहले 🙂 शवासन से पहले आप कोई भी आसन कर सकते है  जिस -जिस आसन को आपने अपने Daily yoga life में शामिल किया है उसे करने के बाद शवासन का अभ्यास करे |

शवासन के बाद :-  शवासन सबसे अंतिम में किया जाता है इसके बाद आपको किसी और योगासन को नहीं करना. चाहिए 1 शवासन से शरीर और मन दोनों की थकान कम हो जाती है। इसके बाद आपना कोई भी काम कर सकते है

शवासन की सवधानिया :  वैसे तो शवासन की कोई सावधानिया नहीं है। प्रत्येक उम्र के व्यक्ति के लिए लाभदायक है|  किसी भी समय आप कर सकते हैं फिर भी अगर आपको डॉक्टर ने सीधे लेटने से मना किया है  किसी बिमारी में तो ये आसन ना करे |

शवासन के लाभ – Benefits of Shavasana in hindi 

थकान दूरी होती है: शवासन का सबसे बड़ा.कार्य होता है हमारे शरीर के थकान को काम करना | इस आसन को करने से शरीर की सारी थकान खत्म हो जाती है। शाम को ये आसन करने से हमारे दिन भर की थकान कुछ समय में ही खत्म हो जाती है। योगासन करने के बाद होने वाली शारीरिक और मानसिक दोनो प्रकार की थकावट को कम करता है।

तनाव कम होता :-  शवासन करने से तनाव काफी कम हो जाता है। मन मे चल रही सारी तनाव चिंता से छुटकारा मिलता है |

3. क्रोध पर नियंत्रण 🙂 व्यक्ति ज्यादातर क्रोध उस समय करता है जब उसको मानसिक या शारीरिक थकान हो शवासन करने से व्यक्ति क्रोध पर भी नियंत्रण पा लेता है। जिससे व्यक्ति का जीवन सुखमय बन जाता है।

4. शरीर को रिलैक्स और शांत करता :- शवासन के नियमित अभ्यास से शरीर को रिलैक्स (आराम) तथा मन को शांति मिलती है।

शरीर की मेडिटेशन की स्थित : –  इस आसन को करने से मेडिटेशन वाले लाभ प्राप्त होते हैं। एक तरह से शासन भी मेडिटेशन ही है। जिससे मन को नियंत्रित किया जाता है |

shavasana in hindi
shavasana in hindi

रक्तचाप और एंग्जाइटी:- शवासन करने से रक्तचाप सामान्य रहते है एग्जाइटी कम होती है।

ऊर्जा को स्तर को बढ़ाता है:- इस आसन को करने ऊर्जा का स्तर बढ़ता है शरीर
एकाग्रता और मेमोरी बढ़ाता :-शवासन के रोज अभ्यास से एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है जो आपकी स्मरण शक्ति भी बढ़ा सकती है।

चिंता और बैचेनी को कम करता :- अगर आप का मन हमेशा बेचैन रहता  है। तो आप के लिए  ये आसन बहुत फायदे मंद है। इससे आपको बहुत आराम मिलेगा |

 

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