shambhavi mahamudra | shambhavi mahamudra kriya

शांभवी महामुद्रा – shambhavi mahamudra in hindi 

शांभवी महामुद्रा shambhavi mahamudra हठ योग श्रेणी का योगासन है। शांभवी मुद्रा में व्यक्ति अपनी तीसरी आंख यानि आज्ञा चक्र जागृत करता है। इस मुद्रा में व्यक्ति अपने शरीर मन को कंट्रोल कर सकता है |

वह व्यक्ति जो दिखते तो सामान्य है लेकिन उनके कार्य असामान्य होते है। दूसरों से आगे होते है सोच में समझ में |  जो व्यक्ति अपने दिमाग का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करता है। उसके विचार ओरो से भिन्न होते हैं।

जो इस भौतिक जीवन में रहकर उस अद्‌भूत शक्ति का आभास है। जो अपने जीवन स्तर को और से अलग बनाते हैं। माना जाता है कि ऐसे आज्ञा चक्र जागृत रहती है |

shambhavi mahamudra
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जिससे वे खुद को कंट्रोल रखता है। अपनी भावनाओं को सीमित रखता है। यह सब आज्ञा चक्र से ही संभव हो पाता है शाम्भवी मुद्रा उन  व्यक्तियो लिए ज्यादा लाभकारी है जो अपने जीवन से परेशान हैं।

जिन्दगी में आने  वाली मुसिबतों से विचलित हो जाते हैं। जो अपने जीवन में हमेशा सर्घषरत रहते है उन व्यक्तियों के लिए शांभवी मुद्रा एक वरदान है।

आनदंमय जीवन जीने द्वार है। अपने जीवन में स्थिरता बनाये रखने के लिए एक उपाय है। आप को सामान्य जीवन से ऊपर उठाने की जरूरत  है | शाम्भवी महामुद्रा जीवन को खास बनाने में मदद करती है।

हजारो वर्ष से भारत के ऋषि मुनियो योगियो ने भारत में योग के महत्व के बारे में जानकारी दी 1 सामान्य लोगों को इससे अवगत कराया है। ऋषि मुन्मि  सब ध्यान आसन से ही सिद्धी प्राप्त करते थे।

अपने स्वभाव में संतुष्टी का भाव ला पाते थे | उनके श्राप का परिणाम हो चाहे आशिर्वाद का फल सब आज्ञा चक्र से  ही पूर्ण होते हैं।
आज के समय में जहाँ व्यक्ति का सारा जीवन तनाव समस्या को सुलझाने में ही खत्म हो जाता है। मोह-माया, कोद्र, ईष्या, घृणा, , लोभ, लालच सब के मन पर कही ना कही हावी हो जाती है| 

शाम्भवी महामुद्रा से आप इन दुःखो से मुक्ती पा सकते हैं। अपने मन दिमाग और शरीर तीनो को नियंत्रित कर सकते हैं। अपने अन्दर की ऊर्जा को जागृत कर सकते हैं। उनका प्रयोग कर सकते है | 

आने वाले समस्या को हल करने में पहले से ज्यादा कुशल हो जाते हैं। शाम्भवी महामुद्रा करना थोडा कठिन है क्योंकि यह हठ योग की श्रेणी में आता है।

लेकिन अगर कोई  व्यक्ति 40 दिनों तक शाम्भवी महामुद्रा करने में सफल रहा तो वह अपने अन्दर एक अलग (अनोखा) प्रकार का परिवर्तन या चमत्कार देखने को मिलेगा | इस भौतिक संसार में रहते हुए भी उसे आलौकिक दुनिया का ज्ञान दर्शन कर पाएगा | 

shambhavi mudra meaning

शाम्भवी मुद्रा एक प्रकार का हठ योग है। जिसमें व्यक्ति अपने अन्दर छुपे आज्ञा चक्र ऊर्जा को जागृत कर उसका उपयोग करता है।

अपने मन से नकारत्मक विचारों को खत्म कर एक नवीन जीवन की तरफ ले जाता है। व्यक्ति अपने आप को नियंत्रित और अनचाह विचार से छुटकारा पाता है।

कैसे करे शाम्भवी महामुद्रा | shambhavi mahamudra kaise kare

शाम्भवी महामुद्रा बाकि मुद्राओं से कठिन है क्योंकि यह हठ योग की श्रेणी में आता है। लेकिन उतना भी मुश्किल नहीं कि आप कर ही नहीं सकते ।

कुछ दिनों के नियमित अभ्यास से आप शाम्भवी मुद्रा आसानी कर पाएंगे शाम्भवी मुद्रा के शुरुआती समय में बहुत परेशानी होती है। ध्यान करते समय आप थोडा असहज महसुस कर सकते हैं।

कहते हैं कि व्यक्ति जब सो रहा होता है तो उसके दिमाग में विचार उत्पन्न नहीं होती | व्यक्ति दिमाग सुख-दुःख , लाग-हानि से मुक्त होता है। क्योकि जब व्यक्ति सोता है तो उसकी आँखों की पुतली ऊपर की ओर आज्ञा चक्र पर  केन्द्रित होती है।
योग गुरुओं ने इसका प्रयोग जागते समय, बैठ कर की ताकि शरीर में क्या परिवर्तन होगा. इसको  जानने के इच्छुक थे। इस लिए उन्होंने शाम्भवी महामुद्रा का उजागर किया ।

शाम्भवी मुद्रा करते समय आपके सिर में दर्द दोना स्वभाविक है। इसलिए शाम्भवी महामुद्रा कैसे करे इसके बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है। कुछ जरुरी बाते.

shambhavi mahamudra
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शांत स्थान : शाम्भवी महामुद्रा करने से पहले आप कोई शांत स्थान का चुनाव अवश्य  कर कर लें जहाँ पर आप  10 मिनट शांत बैठकर शाम्भवी महामूदा कर सके। कोई ध्वनी या शोर ना हो और ना ही कोई परेशान कर सके |  ऐसे स्थान (जगह) पर ही शाम्भवी मुद्रा करें।

ढीले कपड़े : शाम्भवी महामुद्रा करते समय आप हमेशा ढीले कपडे ही पहने जिसमें आप सुविधाजनक महसूस करते हैं। शरीर पर कोई आभूषण भी धारण ना करे महिला कोई हेवी गहने ना पहले। पुरुष घडी न पहने ज्यादा अच्छा होगा। इससे ध्यान करने में आसानी होगी | बैठने के स्थान पर योगा दरी, मेंट या कम्बल कुछ भी बिछा कर ही बैठ ।

 समय : शाम्भवी महामुद्रा वैसे तो आप कभी भी कर सकते है , लेकिन इस मुद्रा को अगर बहम मुहुर्त में करते हैं तो सबसे ज्यादा लाभ मिलता है।

अगर दिन में करते हैं तो इस बात का अवस्य ध्यान रखे कि खाना-खाने के ३ -४ घंटे बाद ही शाम्भवी महामुद्रा का अभ्यास करें  कभी भी खाने के बाद तुरंत ना करे इससे करने में असुविधा होगी । सबसे अच्छा है कि आप सुबह खाली पेट ही करे लाभ जल्दी मिलेगा ।

 तनाव मुक्त : शाम्भवी महामुद्रां करते समय आप तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें। आपने अन्दर चल रहे नकारत्मक विचारों को त्यागे । चेहरे पर मुस्कुराहट रखे। ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करे | शुरुआत में थोड़ी  परेशानी होगी लेकिन समय के साथ करना सरल हो जाएगा | 

शांभवी महामुद्रा करने की विधि – shambhavi mahamudra steps

  1. सबसे पहले आप शांत जगह पर योगा मेट बिछाकर सुखासन, पदमासन आदि किसी भी आसन में बैठ जाए | 
  2.  अपने हाथों को घुटने पर रखें।
  3.  अपने अगुठे और तर्जनी उगलि को आपस में हल्का से टच करे बांकि तीन उंगलियो को सीधा रखें। ध्यान रहे सभी उगलिया आपस में जुड़ी होनी चाहिए । 
  4. अपनी आँखों के दोनों पुतलियो को माथे के पास लाये जहाँ से eye brow शुरू होता है | 
  5.  चिन को थोड़ा ऊपर करे आँख के पुतलियो को भी ऊपर करके रखे ।
  6.  अब दोनों eye brow के बीच आज्ञा चक्र जिससे कहते है वहाँ ध्यान लगाए ।
  7.  कमर, रिडड की हड्डी को सीधा रखे |
  8.  साँस को सामान्य प्राकृतिक रूप से ले |
  9.  5-10 सैकेड बाद आप के बौहो  पर थोडी कंपन महसूस होगा | 
  10.  अब ध्यान करते  समय अपने अन्दर काल्पनिक दुनिया को देखने का प्रयास करें।
  11. मन को शांत रखें | 

कुछ दिन तक कैसे करने के बाद आपको इसके चमत्कारी फायदे देखने को मिल सकता है | शाम्भवी महामुद्रा को कम से कम ४० दिनों तक करने का प्रयास करें |  उसके बाद ही आपको सकारत्मक प्रभाव देखने को मिलेगा | 

शांभवी महामुद्रा को सरल करने का तरिका 

  1.  अगर आप अपनी बौहें की बीच ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते तो आप अपनी नाक के सबसे नीचले हिस्से की कोन पर लगा सकते हैं। इससे आपके सिर में दर्द कम होगा | 
  2.  आप यह भी नहीं कर सकते है तो जहाँ आप बैठेंगे वहाँ सामाने दीवार पर एक बिंदी का निशान बना दे | बिंदी इतनी ऊंचाई पर बनाए जहां पर आप अपनी चिन और आँखों की पुतलियों को ऊपर करके देख सके | 
  3.  शुद्ध शांत वातावरण  में ध्यान करने में आसानी होगी | 
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शांभवी महामुद्रा करते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ 

  1.  शाम्भवी महामुद्रा करते समय सिर में दर्द होना संभाविक है लेकिन दर्द ज्यादा होने लगे तो शाम्भवी महामुद्रा ना करे | 
  2.  ज्यादा समय तक भी शाम्भवी महामुद्रा करने की कोशिश ना करे क्योंकि हम आम जन है कोई बड़े और तत्पस्वी साधु संत नहीं जिसने कई सालों तक अभ्यास किया है |
  3.  शाम्भवी महामुद्रा को करते समय क्रोधित या तनाव की स्थिती में ना हो | क्योंकि इसके विपरित प्रभाव भी जल्दी पड़ता है।
  4.  शुरुआत में अगर आप नहीं कर पा रहे हैं तो जबरदस्ती करने की कोशिश  ना करे | 
  5. शाम्भवी महामुद्रा करने से पहले आप कोई और योगासन करे इसके बाद ही शाम्भवी महामुद्रा का अभ्यास करे  | 
  6.   सुबह के समय शाम्भवी महामुद्रा करने का प्रयास करे |
  7.  जिनको सिर दर्द के समस्या रहती है तो वह व्यक्ति इस मुद्रा को करने से बचे | 

शांभवी महामुद्रा करने के फायदे – Benefits of shambhavi mahamudra

 एकाग्रता :- शाम्भवी महामुद्रा का सबसे ज्यादा फायदा हमारी स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है। किसी भी कार्य को करते समय ज्याद सजक सचेत रहता है।

कुशलता पूर्वक कार्य करता है। विद्यार्थी जीवन के लिए भी शाम्भवी महामुद्रा अत्यंत लाभकारी माना जाता है क्योंकि एकाग्रस्ता की सबसे ज्यादा जरूरत विद्यार्थी जीवन में ही होता है।

 आनदंमय जीवन :- अगर आप आज की भाग-दौड़ भरी जीवन में शांति से जीना चाहते है  तनाव भरी जीवन में आनंद प्राप्त करना चाहते हैं तो आपके लिए शाम्भवी महामुद्रा अंत्यंत लाभकारी है। शाम्भवी महामुद्रा आपके जीवन से ईर्ष्या, घृणा, क्रोध  आदि को खत्म करता है | सुखमय आनंदमय  जीवन जीवन देता है | 

 तनाव मुक्त : शाम्भवी महामुद्रा के नियमित अभ्यास से आप तनाव मुक्त जीवन जी सकते है। आज के समय में तनाव , चिंता एक सामान्य बात हो गई । व्यक्ति के उम्र चाहे जो भी हो तनाव हर किसी को  है। ऐसे में शाम्भवी महामुद्रा आपको तनाव से छुटकारा दिला सकता है | 

 दिमाग को शांत : शाम्भवी महामुद्रा करने से दिमाग को शांति मिलती है। शरीर के साथ-साथ आपके दिमाग पर भी नियंत्रण बना रहता है। नकारात्मक विचारों को खत्म कर दिमाग को शांति प्रदान करता है | 

५ ) चेतना जागृत :- शाम्भवी महामुद्रा में व्यक्ति अपने आज्ञा चक्र को जागृत करता है। अपने अन्दर छुपी हुई ऊर्जा को जागृत करता है उसका प्रयोग करता है | चेतना जागृत होने पर आलोकिक शक्ति का ज्ञान होता है।

6) मानव मस्तिष्क की नसों को आराम :- शाम्भवी महामुद्रा से दिमाग की नसों को आराम मिलता है | 

७ )  आध्यात्मिक लाभ :- शाम्भवी महामुद्रा करने से आज्ञा चक्र जागृत होती है जिसे से व्यक्ति अपने शरीर, मन और दिमाग तीनो पर कंट्रोल करता है। ऐसा माना जाता है कि शाम्भवी मुद्रा करने वाले व्यक्ति जो लम्बे समय से कर रहा हो उसे भूत भविष्य का ज्ञान हो जात है।

वह अपने भूतकाल में हुई घटनाओं को भी देख सकता है और अपने आने वाले कल को भी देख सकता है। शाम्भवी महामुद्रा करने आप अपने दिमाग पर पूरी तरह कंट्रोल कर सकते है।

शाम्भवी मुद्रा और शाम्भवी महामुद्रा में अन्तर

शाम्भवी मुद्रा शुरुआत तौर पर है जबकि महामुद्रा शाम्भवी मुद्रा का उच्च स्तर माना जाता है। दोनों में थोड़ा बहुत ही अन्तर है। शाम्भवी मुद्रा जहाँ हमे भौतिक दुनिया से बाहर निकालता है |

वही शाम्भवी महामुद्रा हमे आलौकिक दुनिया में प्रवेश द्वार बनता है। गृहस्त जीवन में शाम्भवी मुद्रा काफी लाभकारी है। इससे हमारे मन के नकारत्मक विचार खत्म होता है | 

 शाम्भवी महामुद्रा से जुड़े कुछ सवाल 

क्या शाम्भवी महामुद्रा व्यक्ति के भौतिक जीवने को खत्म कर देता है?

नहीं, ऐसा नहीं है कि आप शाम्भवी मुद्रा करते हैं तो आपका जाता इस भौतिक दुनिया से बिल्कुल खत्म हो जाएगा | शाम्भवी मुद्रा से तो व्यक्ति भौतिक जीपने में रहते हुए उस परम पिता परमेश्वर की शक्ति को जानता है महसूस करता है।

शाम्भवी मुद्रा की समय सीमा क्या होनी चाहिए ?

शाम्भवी मुद्रा करते समय यदि आपके सिर ज्यादा दर्द ना हो तो आप इसके समय सीमा को रोज धीरे-धीरे बढ़ा सकते है । कभी भी समय सीमा एक दो दिन में ना बढ़ाए शुरुआत में 10 मिनट काफी है।

क्या ॐ का उच्चारण करना चाहिए ?

शाम्भवी मुद्रा  में ॐ का उच्चारण जरुरी नहीं होता है । आप चाहे तो पहले चिन मुद्रा  कर सकते उसके बाद शाम्भवी मुद्रा कर सकते है |

अशवनी मुद्रा करना क्या जरूरी है शाम्भवी मुद्रा के बाद ?

शाम्भवी मुद्रा के बाद अशवनी  मुझ करना लाभदायक माना जाता है।

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